Hindi A

CBSE Class 10 Hindi A Syllabus for academic session 2026-27
This page contains the CBSE Class 10 Hindi A syllabus for the academic session 2026-27, as prescribed by CBSE curriculum.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा समय-समय पर दक्षता आधारित शिक्षा, कला समेकित अधिगम, अनुभवात्मक अधिगम को अपनाने की बात की गई है, जो शिक्षार्थियों की प्रतिभा को उजागर करने, खेल-खेल में सीखने पर बल देने, आनंदपूर्ण ज्ञानार्जन और विद्यार्जन के विविध तरीकों को अपनाने तथा अनुभव के द्वारा सीखने पर बल देती है।
दक्षता आधारित शिक्षा से तात्पर्य है- सीखने और मूल्यांकन करने का एक ऐसा दृष्टिकोण, जो शिक्षार्थी के सीखने के प्रतिफल और विषय में विशेष दक्षता को प्राप्त करने पर बल देता है। दक्षता वह क्षमता, कौशल, ज्ञान और दृष्टिकोण है, जो व्यक्ति को वास्तविक जीवन में कार्य करने में सहायता करती है। इससे शिक्षार्थी यह सीख सकते हैं कि ज्ञान और कौशल को किस प्रकार प्राप्त किया जाए तथा उन्हें वास्तविक जीवन की समस्याओं पर कैसे लागू किया जाए। जीवनोपयोगी बनाना तथा वास्तविक जीवन के अनुभवों से पाठ को समृद्ध करना, ही दक्षता आधारित शिक्षा है। इसके लिए उच्च स्तरीय चिंतन कौशल पर विशेष बल देने की आवश्यकता है।
कला समेकित अधिगम को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में सुनिश्चित करना अत्यधिक आवश्यक है। कला के संसार में कल्पना की एक अलग ही उड़ान होती है। कला एक व्यक्ति की रचनात्मक अभिव्यक्ति है। कला समेकित अधिगम से तात्पर्य है- कला के विविध रूपों संगीत, नृत्य, नाटक, कविता, रंगशाला, पात्र, मूर्तिकला, आभूषण बनाना, गीत लिखना, नुक्कड़ नाटक, कोलाज, पोस्टर, कला प्रदर्शनी को शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना। किसी विषय को आरंभ करने के लिए आइस ब्रेकिंग गतिविधि के रूप में तथा सामंजस्यपूर्ण समझ पैदा करने के लिए अंतरविषयक या बहुविषयक परियोजनाओं के रूप में कला समेकित अधिगम का प्रयोग किया जाना चाहिए। इससे पाठ अधिक रोचक एवं ग्राह्य हो जाएगा।
अनुभवात्मक अधिगम या आनुभविक ज्ञानार्जन का उद्देश्य शैक्षिक वातावरण को शिक्षार्थी-केंद्रित बनाने के साथ-साथ स्वयं मूल्यांकन करने, आलोचनात्मक रूप से सोचने, निर्णय लेने तथा ज्ञान का निर्माण कर उसमें पारंगत होने से है। यहाँ शिक्षक की भूमिका सुविधा प्रदाता व प्रेक्षक की रहती है। आकलन, अनुभावात्मक ज्ञानार्जन, सहयोगात्मक तथा स्वयं सहर्ष होना, और यह शिक्षार्थियों को एक साथ काम करने तथा अनुभव के द्वारा सीखने पर बल देता है। यह सिद्धांत इस धारणा पर बल देता है कि ज्ञान अनुभव है।
सामाजिक स्तर तक आते-आते विद्यार्थी किशोर हो चुका होता है और उसमें सुनने, बोलने, पढ़ने, लिखने के साथ-साथ व्यावसायिक दृष्टि विकसित होने लगती है। भाषा के कौशलोंपरक गद्य, कथासाहित्य/कवितासाहित्य, एकांकी, व्यंग्य और चित्र की रचना की क्षमता उसमें परिपक्वता भी सामान्य हिंदी साहित्य, अलंकार, रस का परिचय, लेखन की विभिन्न कला-रूपों और आलोचनात्मक और अनुसार, व्याकरण में उपसर्ग, प्रत्यय, लिंग, वचन, कारक, संधि, समास का परिचय एवं सामान्य हिंदी से विद्यार्थी परिचित हो जाता है। इतना ही नहीं वह विविध विधाओं और अभिव्यक्ति की अनेक शैलियों से भी परिचित हो चुका होता है। इन विद्यार्थियों की रुचि आस-पास, समाज, देश की सोच को सीखने हेतु वैश्विक विस्तार तक फैला जाती है।
इन बच्चों की दुनिया में समाचार, खेल, फिल्म तथा अन्य कलाओं के साथ-साथ पत्र-पत्रिकाएँ और अलग-अलग तरह की किताबें भी प्रवेश पा चुकी होती हैं।
इस स्तर पर मातृभाषा हिंदी का अध्ययन साहित्यिक, सांस्कृतिक और व्यावहारिक भाषा के रूप में कुछ इस तरह से हो कि उच्चतर माध्यमिक स्तर पर पहुँचते-पहुँचते यह विद्यार्थियों की पहचान, आत्मविश्वास और विमर्श की भाषा बन सके। प्रयास यह भी हो कि विद्यार्थी भाषा के लिखित प्रयोग के साथ-साथ सहज और स्वाभाविक मौखिक अभिव्यक्ति में भी सक्षम हो सके।
इस पाठ्यक्रम के अध्ययन से –
(क)
विद्यार्थी अगले स्तरों पर अपनी रुचि और आवश्यकता के अनुरूप हिंदी की पढ़ाई कर सकेंगे तथा हिंदी में बोलने और लिखने में सक्षम हो सकेंगे।
(ख)
अपनी भाषा दक्षता के चलते उच्चतर माध्यमिक स्तर पर विज्ञान, समाज विज्ञान और अन्य के साथ सहज संबद्धता (अंतर्संबंध) स्थापित कर सकेंगे।
(ग)
दैनिक जीवन व्यवहार के विविध क्षेत्रों में हिंदी के औपचारिक/अनौपचारिक उपयोग की दक्षता हासिल कर सकेंगे।
(घ)
भाषा प्रयोग के परंपरागत तौर-तरीकों एवं विधाओं की जानकारी एवं उनके समसामयिक संदर्भों की समझ विकसित कर सकेंगे।
(ङ)
हिंदी भाषा में दक्षता का इस्तेमाल वे अन्य भाषा-संरचनाओं की समझ विकसित करने के लिए कर सकेंगे।
दृश्य-श्रव्य, मल्टीमीडिया तथा विविध प्रिंट माध्यमों से प्रसारित सूचनाओं को समझना विश्लेषित करना और संप्रेषित कर सकेंगे।
कक्षा आठवीं तक अर्जित भाषिक कौशलों (सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना) का उत्तरोत्तर विकास।
सृजनात्मक साहित्य के आलोचनात्मक आस्वाद की क्षमता का विकास।
स्वतंत्र और मौखिक रूप से अपने विचारों की अभिव्यक्ति का विकास।
ज्ञान के विभिन्न अनुशासनों के विमर्श की भाषा के रूप में हिंदी की विशिष्ट प्रकृति एवं क्षमता का बोध कराना।
साहित्य की प्रभावकारी क्षमता का उपयोग करते हुए सभी प्रकार की विविधताओं (राष्ट्रीयता, धर्म, जाति, लिंग एवं भाषा) के प्रति सकारात्मक और संवेदनशील आचार-विचार का विकास।
भारतीय भाषाओं एवं विदेशी भाषाओं की सांस्कृतिक विविधता से परिचय।
व्यावहारिक और दैनिक जीवन में विविध अभिव्यक्तियों की मौखिक व लिखित क्षमता का विकास।
संचार माध्यमों (प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक) में प्रयुक्त हिंदी की प्रकृति से अवगत कराना और नवीन भाषा प्रयोग करने की क्षमता से परिचय। (मल्टीमीडिया, सोशल मीडिया, पॉडकास्ट, ब्लॉग)
विश्लेषण और तर्क क्षमता का विकास।
भावाभिव्यक्ति क्षमताओं का उत्तरोत्तर विकास।
मतभेद, विरोध और टकराव की परिस्थितियों में भी भाषा को संवेदनशील और तर्कपूर्ण इस्तेमाल से शांतिपूर्ण संवाद की क्षमता का विकास।
भाषा की समावेशी और बहुभाषिक प्रकृति की समझ और व्यवहार का विकास करना।
शिक्षण युक्तियाँ
माध्यमिक कक्षाओं में अध्यापक की भूमिका उचित वातावरण के निर्माण में सहायक होनी चाहिए। भाषा और साहित्य की पढ़ाई में इस बात पर ध्यान देने की जरूरत होगी कि –
विद्यार्थी द्वारा की जा रही गलतियों को भाषा के विकास के अनिवार्य चरण के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए, जिससे विद्यार्थी अबाध रूप से बिना झिझक के लिखित और मौखिक अभिव्यक्ति करने में उत्साह का अनुभव करें। विद्यार्थियों पर शुद्धि का ऐसा दबाव नहीं होना चाहिए कि वे तनाव महसूस करने लगें। उन्हें भाषा के सहज, कारगर और रचनात्मक रूपों से इस तरह परिचित कराना उचित है कि वे स्वयं, सहज रूप से भाषिक योग्यताओं का विकास कर सकें।
विद्यार्थी स्वतंत्र और अबाध रूप से लिखित और मौखिक अभिव्यक्ति करें। अधिगम बाधित होने पर अध्यापक, अध्यापन शैली में परिवर्तन करें।
ऐसे शिक्षण-बिंदुओं की पहचान की जाए, जिनसे कक्षा में विद्यार्थी निरंतर सक्रिय भागीदारी करें और अध्यापक भी इस प्रक्रिया में उनके साथी बनें।
हर भाषा का अपना व्याकरण होता है। भाषा की इस प्रकृति की पहचान कराने में परिवेशगत और पाठगत संदर्भों का प्रयोग करना चाहिए। यह पूरी प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए कि विद्यार्थी स्वयं को शोधकर्ता समझें तथा अध्यापक इसमें केवल निर्देशन करें।
हिंदी में क्षेत्रीय प्रयोगों, अन्य भाषाओं के प्रयोगों के उदाहरण से यह बात स्पष्ट की जानी चाहिए कि ये प्रयोग विभेदीकरण नहीं उत्पन्न करते है, बल्कि लिपि भाषा के समावेशी स्वरूप को पुष्ट करते हैं और उसका परिवेश अनिवार्य रूप से बहुभाषिक होता है।
भिन्न क्षमता वाले विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त शिक्षण-सामग्री का इस्तेमाल किया जाए तथा किसी भी प्रकार से उन्हें अन्य विद्यार्थियों से कमतर या अलग न समझा जाए।
कक्षा में अध्यापक को हर प्रकार की विविधताओं (लिंग, जाति, वर्ग, धर्म आदि) के प्रति सकारात्मक और संवेदनशील वातावरण निर्मित करना चाहिए।
काव्य भाषा के मर्म से विद्यार्थी का परिचय कराने के लिए ज़रूरी होगा कि किताबों में आए काव्यांशों की लयबद्ध प्रस्तुतियों के ऑडियो-वीडियो कैसेट तैयार किए जाएाँ। अगर आसानी से कोई गायक/गायिका मिले तो कक्षा में मध्यकालीन साहित्य के अध्यापन-शिक्षण में उससे मदद ली जानी चाहिए।
रा.शै.अ. और प्र.प.,(एन.सी.ई.आर.टी.) द्वारा उपलब्ध कराए गए अधिगम प्रतिफल/सीखने-सिखाने की प्रक्रिया जो इस पाठ्यचर्या के साथ संलग्नक के रूप में उपलब्ध है, को शिक्षक द्वारा दक्षता आधारित शिक्षा का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करने की आवश्यकता है।
शिक्षा मंत्रालय के विभिन्न संगठनों तथा स्वतंत्र निर्माताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए कराए गए अन्य कार्यक्रम/ ई-सामग्री वृत्तचित्रों और फीचर फिल्मों को शिक्षण-सामग्री के तौर पर इस्तेमाल करने की जरूरत है। इनके प्रदर्शन के क्रम में इन पर लगातार बातचीत के जरिए सिनेमा के माध्यम से भाषा के प्रयोग की विशिष्टता की पहचान कराई जा सकती है और हिंदी की अलग-अलग छटा दिखाई जा सकती है।
कक्षा में सिर्फ पाठ्यपुस्तक की उपस्थिति से बेहतर होगा कि शिक्षक के हाथ में तरह-तरह की पाठ्यसामग्री को विद्यार्थी देखें और कक्षा में अलग-अलग मौकों पर शिक्षक उनका इस्तेमाल करें।
भाषा लगातार ग्रहण करने की क्रिया में बनती है, इसे प्रदर्शित करने का एक तरीका यह भी है कि शिक्षक खुद यह सिखा सकें कि वे भी शब्दकोश, साहित्यकोश, संदर्भग्रंथ की लगातार मदद ले रहे हैं। इससे विद्यार्थियों में इनके इस्तेमाल करने को लेकर तत्परता बढ़ेगी। अनुमान के आधार पर निकटतम अर्थ तक पहुँच कर संतुष्ट होने की जगह वे सटीक अर्थ की खोज करने के लिए प्रेरित होंगे। इससे शब्दों की अलग-अलग रंगत का पता चलेगा, वे शब्दों के सूक्ष्म अंतर के प्रति और सजग हो पाएँगे।
श्रवण व वाचन (मौखिक बोलना) संबंधी योग्यताएँ
श्रवण (सुनना) कौशल
वर्णित या पठित सामग्री, वार्ता, भाषण, परिचर्चा, वार्तालाप, वाद-विवाद, कविता-पाठ आदि को सुनकर अर्थ ग्रहण करना, विश्लेषित मूल्यांकन करना और अभिव्यक्ति के ढंग को जानना।
वक्तव्य के भाव, विनोद व उसमें निहित संदेश, व्यंग्य आदि को समझना।
वैचारिक मतभेद होने पर भी वक्ता की बात को ध्यानपूर्वक, धैर्यपूर्वक व शिष्टाचार के साथ सुनना व वक्ता के दृष्टिकोण को समझना।
ज्ञानार्जन, मनोरंजन व प्रेरणा ग्रहण करने हेतु सुनना।
वक्तव्य का आलोचनात्मक विश्लेषण करना एवं सुनकर उसका सार ग्रहण करना।
श्रवण (सुनना) वाचन (बोलना) का परीक्षण : कुल 5 अंक (2.5+2.5)
परीक्षक किसी प्रासंगिक विषय पर एक अनुच्छेद का स्पष्ट वाचन करेगा। अनुच्छेद तथ्यात्मक या सुझावात्मक हो सकता है। अनुच्छेद लगभग 100-150 शब्दों का होना चाहिए।
या
परीक्षक 1-2 मिनट का श्रव्य अंश (ऑडियो क्लिप) सुनवाएगा। अंश रोचक होना चाहिए। कथ्य /घटनापूर्ण एवं स्पष्ट होना चाहिए। वाचक का उच्चारण शुद्ध, स्पष्ट एवं विराम चिह्नों के उचित प्रयोग सहित होना चाहिए।
परीक्षार्थी ध्यानपूर्वक परीक्षा/ऑडियो क्लिप को सुनने के पश्चात परीक्षक द्वारा पूछे गए प्रश्नों का अपनी समझ से मौखिक उत्तर देंगे।
कौशलों के मूल्यांकन का आधार
श्रावण
वाचन
1
विद्यार्थी में परिचित संदर्भों में प्रयुक्त शब्दों और पदों को समझने की सामान्य योग्यता है।
1
विद्यार्थी केवल अलग-अलग शब्दों और पदों के प्रयोग की योग्यता प्रदर्शित करता है।
2
छोटे सुसंबद्ध कथनों को परिचित संदर्भों में समझने की योग्यता है।
2
परिचित संदर्भों में शुद्धता से केवल छोटे सुसंबद्ध कथनों का सीमित प्रयोग करता है।
3
परिचित या अपरिचित दोनों संदर्भों में कथित सूचना को स्पष्ट समझने की योग्यता है।
3
अपेक्षित दीर्घ भाषण में जटिल कथनों के प्रयोग की योग्यता प्रदर्शित करता है।
4
दीर्घ कथनों को पर्याप्त शुद्धता से समझता है और निष्कर्ष निकाल सकता है।
4
अपरिचित स्थितियों में विचारों को तार्किक ढंग से संगठित कर धाराप्रवाह रूप में प्रस्तुत कर सकता है।
5
जटिल कथनों के विचार-बिंदुओं को समझने और विश्लेषित करने की योग्यता प्रदर्शित करता है।
5
उद्देश्य और श्रोता के लिए उपयुक्त शैली को अपना सकता है।
टिप्पणी
परीक्षण से पूर्व परीक्षार्थी को तैयारी के लिए कुछ समय दिया जाए।
विवरणात्मक भाषा में विषय के अनुकूल तीनों कालों का प्रयोग अपेक्षित है।
निर्धारित विषय परीक्षार्थी के अनुभव संसार के हों, जैसे – कोई चुटकुला या हास्य-प्रसंग सुनाना, हाल में पढ़ी पुस्तक या देखे गए सिनेमा की कहानी सुनाना।
शिक्षार्थी को विषय-केंद्रित स्वतंत्र अभिव्यक्ति करने का अवसर प्रदान करें।
पठन कौशल
सरसरी दृष्टि से पढ़कर पाठ का केंद्रीय विचार ग्रहण करना।
एकाग्रचित्त हो एक अभीष्ट गति के साथ मौन पठन करना।
पठित सामग्री पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करना।
भाषा, विचार एवं शैली की सराहना करना।
साहित्य के प्रति अभिरुचि का विकास करना।
साहित्य की विभिन्न विधाओं की प्रकृति के अनुसार पठन कौशल का विकास।
संदर्भ के अनुसार शब्दों के अर्थ–भेदों की पहचान करना।
सक्रिय (व्यवहारोपयोगी) शब्द भंडार की वृद्धि करना।
पठित सामग्री के विभिन्न अंशों का परस्पर संबंध समझना।
पठित अनुच्छेदों के शीर्षक एवं उपशीर्षक देना।
कविता के प्रमुख उपादान यथा – तुक, लय, यति, गति, बलाघात आदि से परिचित कराना।
लेखन कौशल
लिपि के मान्य रूप का ही व्यवहार करना।
विराम-चिह्नों का उपयुक्त प्रयोग करना।
प्रभावपूर्ण भाषा तथा लेखन-शैली का स्वाभाविक रूप से प्रयोग करना।
उपयुक्त अनुच्छेदों में बााँटकर लिखना।
प्रार्थना पत्र, निमंत्रण पत्र, बधाई पत्र, संवेदना पत्र, ई-मेल, आदेश पत्र, एस.एम.एस आदि लिखना और विविध प्रपत्रों को भरना।
विविध स्रोतों से आवश्यक सामग्री एकत्र कर अभीष्ट विषय पर निबंध लिखना।
देखी हुई घटनाओं का वर्णन करना और उन पर अपनी प्रतिक्रिया देना।
हिंदी की एक विधा से दूसरी विधा में रूपांतरण का कौशल।
समारोह और गोष्ठियों की सूचना और प्रतिवेदन तैयार करना।
सार, संक्षेपीकरण एवं भावार्थ लिखना।
गद्य एवं पद्य अवतरणों की व्याख्या लिखना।
स्वानुभूत विचारों और भावनाओं को स्पष्ट सहज और प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करना।
क्रमबद्धता और प्रकरण की एकता बनाए रखना।
लिखने में सृजनात्मकता लाना।
अनावश्यक काट-छााँट से बचते हुए सुपाठ्य लेखन कार्य करना
दो भिन्न पाठों की पाठ्यवस्तु पर चिंतन करके उनके मध्य की संबद्धता (अंतर्संबंधों) पर अपने विचार अभिव्यक्त करने में सक्षम होना।
रटे-रटाए वाक्यों के स्थान पर अभिव्यक्तिपरक/स्थिति आधारित/ उच्च चिंतन क्षमता वाले प्रश्नों पर सहजता से अपने मौलिक विचार प्रकट करना।
रचनात्मक अभिव्यक्ति
अनुच्छेद लेखन
पूर्णता – संबंधित विषय के सभी पक्षों को अनुच्छेद के सीमित आकार में संयोजित करना
क्रमबद्धता– विचारों को क्रमबद्ध एवं तर्कसंगत विधि से प्रकट करना
विषय-केंद्रित – प्रारंभ से अंत तक अनुच्छेद का एक सूत्र में बाँधा होना
सामासिकता – अनावश्यक विस्तार न देकर सीमित शब्दों में यथासंभव विषय से संबद्ध पूरी बात कहने का प्रयास करना
पत्र लेखन
अनौपचारिक पत्र विचार-विमर्श का ज़रिया, जिनमें मैत्रीपूर्ण भावना निहित, सरलता, संक्षिप्त और सादगी से भरी लेखन शैली
औपचारिक पत्रों द्वारा दैनिक जीवन की विभिन्न स्थितियों में कार्य, व्यापार, संवाद, परामर्श, अनुरोध तथा सुझाव के लिए प्रभावी एवं स्पष्ट संप्रेषण क्षमता का विकास
सरल और बोलचाल की भाषा शैली, उपयुक्त, सटीक शब्दों के प्रयोग, सीधे-सादे ढंग से विषय की स्पष्ट और प्रत्यक्ष प्रस्तुति
प्रारूप की आवश्यक औपचारिकताओं के साथ सुस्पष्ट, सुलझे और क्रमबद्ध विचार आवश्यक; तथ्य, संक्षिप्तता और संपूर्णता के साथ प्रभावी प्रस्तुति
विज्ञापन लेखन
(विज्ञापित वस्तु / विषय को केंद्र में रखते हुए)
विज्ञापित वस्तु के विशिष्ट गुणों का उल्लेख
आकर्षक लेखन शैली
प्रस्तुति में नयापन, वर्तमान से जुड़ाव तथा दूसरों से भिन्नता
विज्ञापन में आवश्यकतानुसार नारे (स्लोगन) का उपयोग
विज्ञापन लेखन में बॉक्स, चित्र अथवा रंग का उपयोग अनिवार्य नहीं है, किंतु समय होने पर प्रस्तुति को प्रभावी बनाने के लिए इनका उपयोग किया जा सकता है।
संवाद लेखन
(दी गई परिस्थितियों के आधार पर संवाद लेखन)
सीमा के भीतर एक दूसरे से जुड़े सार्थक और उद्देश्यपूर्ण संवाद
पात्रों के अनुकूल भाषा शैली
कोष्ठक में वक्ता के हाव-भाव का संकेत
संवाद लेखन के अंत तक विषय/मुद्दे पर वार्ता पूरी
लघुकथा लेखन
(दिए गए विषय/शीर्षक आदि के आधार पर रचनात्मक सोच के साथ लघुकथा लेखन)
कथात्मकता
निरंतरता, जिज्ञासा/रोचकता/कल्पनाशीलता
प्रभावी संवाद/ पात्रानुकूल संवाद
रचनात्मकता
उद्देश्यपरकता
संदेश लेखन
(शुभकामना, पर्व-त्योहारों एवं विशेष अवसरों पर दिए जाने वाले संदेश)
विषय से संबद्धता
संक्षिप्त और सारगर्भित
भाषाई दक्षता एवं प्रस्तुति
रचनात्मकता/सृजनात्मकता
विषय के अनुकूल काव्य-पंक्तियों का आंशिक उपयोग, किंतु इसकी अनिवार्यता नहीं
ई-मेल लेखन
(विविध विषयों पर आधारित औपचारिक ई-मेल लेखन)
बोधगम्य भाषा
विषय से संबद्धता
संक्षिप्त, स्पष्ट व सारगर्भित
शिष्टाचार व औपचारिकताओं का निर्वाह
स्ववृत्त लेखन
(उपलब्ध रिक्ति के लिए स्ववृत्त लेखन)
स्पष्ट, संपूर्ण व व्यवस्थित
नाम, जन्मतिथि, वर्तमान पता, शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, अभिरुचियों, आत्मकथ्य, दूरभाष आदि का उल्लेख (परीक्षा में गोपनीयता का निर्वाह अपेक्षित)
अन्य विशेष जानकारी/ योग्यता आदि
सूचना लेखन
(औपचारिक शैली में व्यावहारिक जीवन से संबंधित विषयों पर आधारित सूचना लेखन)
सरल एवं बोधगम्य भाषा
विषय की स्पष्टता
विषय से जुड़ी संपूर्ण जानकारी
औपचारिक शिष्टाचार का निर्वाह
परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम विनिर्देशन
खंड
भारांक
अपठित बोध
14
व्यावहारिक व्याकरण
16
पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक
30
रचनात्मक लेखन
20
भारांक-{80(वार्षिक बोर्ड परीक्षा )+20 (आंतरिक परीक्षा)
Syllabus
निर्धारित समय- 3 घंटे
भारांक-80
वार्षिक बोर्ड परीक्षा हेतु भार विभाजन
खंड – क (अपठित बोध)
हिषयिस्तु
उप भार
कुल भार
1.
अपठित गद्यांश व काव्यांश पर बोध, चिंतन, विश्लेषण, सराहना आदि पर बहुविकल्पीय, अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक प्रश्न
14
एक अपठित गद्यांश लगभग 250 शब्दों का इसके आधार पर एक अंकीय तीन बहुविकल्पी प्रश्न (1×3=3), अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4) पूछे जाएंगे
7
एक अपठित काव्यांश लगभग 120 शब्दों का इसके आधार पर एक अंकीय तीन बहुविकल्पी प्रश्न (1×3=3), अतिलघूत्तरात्मक एवं लघूत्तरात्मक प्रश्न (2×2=4) पूछे जाएंगे
7
2
व्याकरण के लिए निर्धारित विषयों पर विषयवस्तु का बोध, भाषिक बिंदु/ संरचना आदि पर अतिलघूत्तरात्मक/लघूत्तरात्मक प्रश्न। (1×16)
(कुल 20 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें से केवल 16 प्रश्नों के उत्तर देने होंगे)
16
खंड – ख (व्यावहारिक व्याकरण)
1
रचना के आधार पर वाक्य भेद (1×4=4) (5 में से 4 प्रश्न करने होंगे)
4
2
वाच्य (1×4=4) (5 में से 4 प्रश्न करने होंगे)
4
3
पद परिचय (1×4=4) (5 में से 4 प्रश्न करने होंगे)
4
4
अलंकार- (अर्थालंकार : उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति, मानवीकरण) (1×4=4) (5 में से 4 प्रश्न करने होंगे)
4
3
खंड – ग (पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक)
30
गद्य खंड पाठ्यपुस्तक (क्षितिज भाग 2 )
11
1
क्षितिज (भाग 2 ) से निर्धारित पाठों में से गद्यांश के आधार पर विषयवस्तु का ज्ञान,बोध, अभिव्यक्ति आदि पर एक अंकीय पाँच बहुविकल्पी प्रश्न पूछे जाएंगे। (1×5)
5
2
क्षितिज (भाग 2 ) से निर्धारित पाठों में से विषयवस्तु का ज्ञान, बोध, अभिव्यक्ति आदि पर तीन प्रश्न पूछे जाएंगे।(विकल्प सहित- 25-30 शब्द-सीमा वाले 4 में से 3 प्रश्न करने होंगे) (2×3)
6
काव्य खंड (पाठ्यपुस्तक) (क्षितिज भाग 2 )
11
1
क्षितिज(भाग 2 ) से निर्धारित कविताओं में से काव्यांश के आधार पर एक अंकीय पाँच बहुविकल्पी प्रश्न पूछे जाएंगे (1×5)
5
2
क्षितिज (भाग 2 ) से निर्धारित कविताओं के आधार पर विद्यार्थियों का काव्यबोध परखने हेतु तीन प्रश्न पूछे जाएंगे। (विकल्प सहित-25-30 शब्द-सीमा वाले 4 में से 3 प्रश्न करने होंगे) (2×3)
6
पूरक पाठ्यपुस्तक (कृतिका भाग – 2)
8
कृतिका (भाग 2 ) से निर्धारित पाठों पर आधारित दो प्रश्न पूछे जाएंगे। (4×2) (विकल्प सहित-50-60 शब्द-सीमा वाले 3 में से 2 प्रश्न करने होंगे)
8
4
खंड – घ (रचनात्मक लेखन)
i
विभिन्न विषयों और संदर्भों पर विद्यार्थियों के तर्कसंगत विचार प्रकट करने की क्षमता को परखने के लिए संकेत-बिंदुओं पर आधारित समसामयिक एवं व्यावहारिक जीवन से जुड़े हुए तीन विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में अनुच्छेद लेखन (6×1=6)
6
20
ii
अभिव्यक्ति की क्षमता पर केंद्रित औपचारिक अथवा अनौपचारिक विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 100 शब्दों में पत्र (5×1=5)
5
iii
रोजगार से संबंधित रिक्तियों के लिए लगभग 80 शब्दों में स्ववृत्त लेखन (5×1=5)
अथवा
विविध विषयों पर आधारित लगभग 80 शब्दों में ई-मेल लेखन (5×1=5)
5
iv
विषय से संबंधित लगभग 40 शब्दों के अंतर्गत विज्ञापन लेखन (4×1=4)
अथवा
संदेश लेखन लगभग 40 शब्दों में (शुभकामना, पर्व-त्योहारों एवं विशेष अवसरों पर दिए जाने वाले संदेश) (4×1=4)
4
कुल
80
आंतरिक मूल्यांकन
अंक
20
सामयिक आकलन
5
बहुविध आकलन
5
पोर्टफोलियो
5
श्रवण एवं वाचन
5
कुल
100
निर्धारित पुस्तकें :
1.
क्षितिज, भाग–2, एन.सी.ई.आर.टी., नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित नवीनतम संस्करण
2.
कृतिका, भाग–2, एन.सी.ई.आर.टी., नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित नवीनतम संस्करण
नोट – निम्नलिखित पाठों से प्रश्न नहीं पूछे जाएंगे–
क्षितिज, भाग – 2
काव्य खंड
देव- सवैया, कवित्त (पूरा पाठ)
गिरिजाकुमार माथुर – छाया मत छूना (पूरा पाठ)
ऋतुराज – कन्यादान (पूरा पाठ)
गद्य खंड
महावीरप्रसाद द्विवेदी – स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन (पूरा पाठ)
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना- मानवीय करुणा की दिव्य चमक (पूरा पाठ)
कृतिका, भाग – 2
एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! (पूरा पाठ)
जॉर्ज पंचम की नाक (पूरा पाठ)
कक्षा दसवीं हेतु प्रश्न पत्र का विस्तृत प्रारूप जानने के लिए कृपया बोर्ड द्वारा जारी आदर्श प्रश्न पत्र देखें।